‌‌ नव निर्माण

                       

Photo by James Lee on Pexels.com

देश का आम आदमी,

 कभी खास नहीं बन पाता ।

यदि नव निर्माण का विचार,

उसके दिल में न आता ।

आज हर क्षेत्र में,

 पुरुषों के बराबर,

 महिलाओं का जो नाम है, शायद

इसी अनुभूति का सुंदर परिणाम है।

जिनका सफर रहा,

चौके से लेकर चंद्रयान ।

आज पाकर अपना मुकाम,

छू रही हैं वे आसमान ।

 इसी अनुभूति से बदल रहा है आज का युवा भी –

 वस्त्रों में नहीं, विचारों में 

शोषण में नहीं, सुधारों में

 वक्तव्यों में नहीं, कर्तव्यों में

दृष्टव्यों में नहीं, सुकल्पों में ।

 यह अनुभूति हमारे दिलों में,

 ऐसा जोश जगाती है –

 कि भाव के सामने 

भाषा भी छोटी पड़ जाती है ।

पिछले पचास वर्षों से हमारा देश,

विकास की दौड़ में बढ़ रहा है लगातार ।

नन्हे से पौधे ने ले लिया है आज,

वटवृक्ष का आकार ।

अब इससे आगे क्या?

इस अनुत्तरित प्रश्न से हुई शायद

नव निर्माण की अनुभूति ।

गुरुजनों ने जहां एक ओर,

 इस पर चलने का रास्ता दिखाया ।

 तो दूसरी ओर हम भारतीयों ने, 

उसे पूरा करने का,

 बीड़ा भी उठाया । 

चाहें, गरीबों के लिए, 

अन्न दान का प्रयास हो ।

या फिर लोगों की, 

शिक्षित होने की आस हो ।

 चाहें पर्यावरण संरक्षण की मुहिम हो,

या जल संरक्षण ,स्वच्छ जल की  बात ।

हम तैयार हैं सभी समस्याओं से,

निपटने के लिए आज।

 हमने हर वक्त दी है, 

अपने हौसलों को उड़ान ।

और बनाई है देश की, 

अब एक नई पहचान।

 हम जानते हैं-

 हम से ही है समाज,

व देश का गौरवमय आकार ।

 और ऐसा ही समाज है  

देश की प्रगति का आधार ।

 इसलिए आइए नव निर्माण की अनुभूति को –

अपने मजबूत इरादों से,

पूरा करने की लें ठान ।

और कल्पना को साकार कर,

 सार्थक करें नए आयाम।

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