रानी लक्ष्मीबाई — कविता जोशी

(अंतर्नाद) अरे! यह कैसी मची है बाहर हलचल,क्यों हो रहा है इतना कोलाहल ? ओह! ये तो शत्रु सैनिक हैं ,जो गा रहे हैं मेरी प्रशंसा के गीत ।कह रहे हैं- कैसे मुझ दुस्साहसी ने,हारी हुई बाजी ली है जीत । आह! काल के क्रूर हाथों ने ,छीन लिया आज जीवन मेरा ।यदि जीवित रहती…